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भूल गया है क्यों इंसान

सबकी है मिट्टी की काया, सब पर नभ की निर्मल छाया।
यहाँ नहीं कोई आया है, ले विशेष वरदान,
भूल गया है क्यों इंसान?

धरती ने मानव उपजाए, मानव ने ही देश बनाए।
बहु देशों में बसी हुई है, एक धरा-संतान।
भूल गया है क्यों इंसान?

देश अलग है, देश अलग हों, वेश अलग हो, वेश अलग हों।
मानव का मानव से लेकिन, अलग न अंतर प्राण।
भूल गया है क्यों इंसान?

Bhool Gaya Kyon Insaan Hindi Rhymes

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Sabakee Hai Mittee Kee Kaaya, Sab Par Nabh Kee Nirmal Chhaaya.
Yahaan Nahin Koee Aaya Hai, Le Vishesh Varadaan,
Bhool Gaya Hai Kyon Insaan?

Dharatee Ne Maanav Upajae, Maanav Ne Hee Desh Banae.
Bahu Deshon Mein Basee Huee Hai, Ek Dhara-Santaan.
Bhool Gaya Hai Kyon Insaan?

Desh Alag Hai, Desh Alag Hon, Vesh Alag Ho, Vesh Alag Hon.
Maanav Ka Maanav Se Lekin, Alag Na Antar Praan.
Bhool Gaya Hai Kyon Insaan?

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