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पार्वती माता की आरती

Parwati Mata Religious Aarti

पार्वती माता की आरती (Parwati Mata Aarti In Hindi) पार्वती हिमनरेश हिमावन तथा मैनावती की पुत्री हैं तथा भगवान शंकर की पत्नी हैं। उमा, गौरी भी पार्वती के ही नाम हैं। यह प्रकृति स्वरूपा हैं। पार्वती पूर्वजन्म में दक्ष प्रजापति की पुत्री सती थीं तथा उस जन्म में भी वे भगवान शंकर की ही पत्नी थीं। सती ने अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में, अपने पति का अपमान न सह पाने के कारण, स्वयं को योगाग्नि में भस्म . . . Read More . . .

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हनुमान जी की आरती

Hanuman Ji Religious Aarti

हनुमान जी की आरती (Hanuman Aarti In Hindi) समुद्रमंथन के पश्चात शिव जी ने भगवान विष्णु का मोहिनी रूप देखने की इच्छा प्रकट की, जो उन्होनें देवताओँ और असुरोँ को दिखाया था। उनका वह आकर्षक रूप देखकर वह कामातुर हो गए। वायुदेव ने शिव जी के बीज को वानर राजा केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में प्रविष्ट कर दिया। और इस तरह अंजना के गर्भ से वानर रूप हनुमान का जन्म हूआ। . . . Read More . . .


काली माता की आरती

Kaali Mata Religious Aarti

काली माता की आरती (Kaali Mata Aarti In Hindi) काली माता को महाकाली भी कहते हैं। काली माता हिन्दू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं। यह सुन्दरी रूप वाली माँ भगवती दुर्गा का काला और भयप्रद रूप है, जिसकी उत्पत्ति राक्षसों को मारने के लिये हुई थी। काली माता की व्युत्पत्ति काल अथवा समय से हुई है जो सबको अपना ग्रास बना लेता है। माँ का जो यह रूप है वह नाश करने वाला है पर यह रूप सिर्फ . . . Read More . . .

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आरती देवी अन्नपूर्णा जी की

Annapoorana Mata Religious Aarti

आरती देवी अन्नपूर्णा जी की (Annapoorana Mata Aarti In Hindi) अन्नपूर्णा देवी हिन्दुओं द्वारा पूजित एक देवी हैं। उनका दूसरा नाम 'अन्नदा' है। वे शक्ति की ही एक रूप हैं। . . . Read More . . .

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सूर्य देव की आरती

Surya Dev Religious Aarti

सूर्य देव की आरती (Surya Dev Aarti In Hindi) वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है। समस्त चराचर जगत की आत्मा सूर्य ही है। सूर्य से ही इस पृथ्वी पर जीवन है, यह आज एक सर्वमान्य सत्य है। श्रीमदभागवत पुराण में श्री शुकदेव जी के अनुसार भूलोक तथा द्युलोक के मध्य में अन्तरिक्ष लोक है। इस द्युलोक में सूर्य भगवान नक्षत्र तारों के मध्य में विराजमान रह कर तीनों लोकों को प्रकाशित करते हैं। . . . Read More . . .


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