ब्रम्हा जी

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श्री ब्रम्हा चालीसा

Bramha Chalisa Chalisa

"चालीसा" जय जय कमलासान जगमूला, रहहू सदा जनपै अनुकूला। रुप चतुर्भुज परम सुहावन, तुम्हें अहैं चतुर्दिक आनन। रक्तवर्ण तव सुभग शरीरर, मस्तक जटाजुट गंभीरा। ताके ऊपर मुकुट बिराजै, दाढ़ी श्वेत महाछवि छाजै। श्वेतवस्त्र धारे तुम सुन्दर, है यज्ञोपवीत अति मनहर। कानन कुण्डल सुभग बिराजहिं, गल मोतिन की माला राजहिं। चारिहु वेद तुम्हीं प्रगटाये, दिव्य ज्ञान...Read More

धार्मिक चालीसा