प्रसिद्ध दोहे - Couplets

दोहा मात्रिक अर्द्धसम छंद है। दोहा सर्वप्रिय छंद है। दोहा एक ऐसा छंद है जो शब्दों की मात्राओं के अनुसार निर्धारित होता है। इसके दो पद होते हैं तथा प्रत्येक पद में दो चरण होते हैं। पहले चरण को विषम चरण तथा दूसरे चरण को सम चरण कहा जाता है। विषम चरण की कुल मात्रा 13 होती है तथा सम चरण की कुल मात्रा 11 होती है अर्थात दोहा का एक पद 13-11 की यति पर होता है. यति का अर्थ है विश्राम।

यानि भले पद-वाक्य को न तोड़ा जाय किन्तु पद को पढ़ने में अपने आप एक विराम बन जाता है, दोहा छंद मात्रा के हिसाब से 13-11 की यति पर निर्भर न कर शब्द-संयोजन हेतु विशिष्ट विन्यास पर भी निर्भर करता है बल्कि दोहा छंद ही क्यों हर मात्रिक छंद के लिए विशेष शाब्दिक विन्यास का प्रावधान होता है।

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सूरदास के दोहे

Surdas Ke Dohe Dohe - Couplets

"दोहा" मुखहिं बजावत बेनु धनि यह बृंदावन की रेनु। नंदकिसोर चरावत गैयां मुखहिं बजावत बेनु॥ मनमोहन को ध्यान धरै जिय अति सुख पावत चैन। चलत कहां मन बस पुरातन जहां कछु लेन न देनु॥ इहां रहहु जहं जूठन पावहु ब्रज बासिनि के ऐनु। सूरदास ह्यां की सरवरि नहिं कल्पबृच्छ सुरधेनु॥ बूझत स्याम कौन तू गोरी।...Read More

तुलसी दास के दोहे

Tulsidas Ke Dohe Dohe - Couplets

"दोहा" "काम क्रोध मद लोभ की जौ लौं मन में खान। तौ लौं पण्डित मूरखौं तुलसी एक समान॥" "आवत ही हरषै नहीं नैनन नहीं सनेह। तुलसी तहां न जाइये कंचन बरसे मेह॥" "मो सम दीन न दीन हित तुम्ह समान रघुबीर अस बिचारि रघुबंस मनि हरहु बिषम भव भीर॥" "कामिहि नारि पिआरि जिमि लोभिहि प्रिय...Read More

रहीम के दोहे

Rahim Ke Dohe Dohe - Couplets

"दोहा" एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय। रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अगाय॥ रहिमन निज संपति बिना, कोउ न बिपति सहाय। बिनु पानी ज्‍यों जलज को, नहिं रवि सकै बचाय॥ बिगरी बात बनै नहीं, लाख करौ किन कोय। रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय॥ नाद रीझि तन देत मृग, नर धन...Read More

रविदास के दोहे

Ravidas Ke Dohe Dohe - Couplets

"दोहा" "मन चंगा तो कठौती में गंगा।" "गुरु मिलीया रविदास जी दीनी ज्ञान की गुटकी। चोट लगी निजनाम हरी की महारे हिवरे खटकी।।" "जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात। रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।।" "रैदास कनक और कंगन माहि जिमि अंतर कछु नाहिं। तैसे ही अंतर नहीं हिन्दुअन...Read More

कबीर के दोहे

Kabir Ke Dohe Dohe - Couplets

"दोहा" "जब मैं था तब हरी नहीं, अब हरी है मैं नाही। सब अँधियारा मिट गया, दीपक देखा माही॥" "हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना। आपस में दोउ लड़ी-लड़ी मुए, मरम न कोउ जाना॥" "जाति न देखो नेता की, देख लीजिये काम। मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान॥" "दोस पराए देखि...Read More