हिंदी कविता - Hindi Rhymes

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वह - कविता

Vah Har Din Aata Hindi Rhymes

वह हर दिन आता, सोचता बडबडाता, घबडाता कभी मस्त होकर प्रफुल्लता, कोमलता से सुमधुर गाता, न भूख से ही आकुल, न ही दुःख से व्याकुल महान वैचारक धैर्य का परिचायक विकट संवेदनाएँ, गंभीर विडंबनाएँ कुछ सूझते ध्यान में पद, संभलता, बढाता पग! होकर एक दिन विस्मित्, किछ दया दूँ अकिंचित् इससे पहले ही सोचकर…, कहा, जाने क्या संभलकर लुटती, टुटती ह्रदय दीनों की, नष्ट होती स्वत्व संपदा सारी मुझे क्या कुछ देगी, ये व्यस्त, अभ्यस्त दुनिया भिखारी! ...Read More

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चम्मू चींटा - बाल कविता

Chammu Cheenta Hindi Rhymes

चम्मू चींटा चड्डी पहने, पढ़ने पहुंचे शाला। चड्डी तो थी नई-नई पर, नाड़ा ढीला ढाला। खेल- खेल में चड्डी उतरी, चम्मू जी शरमाये। दोस्त सभी उनकी कक्षा के, शेम-शेम चिल्लाये। ...Read More

चिड़िया के थे बच्चे चार

Chidiya Ke Bachche Chaar Hindi Rhymes

चिड़िया के थे बच्चे चार घर से निकले पंख पसार। दूर-दूर तक घूम के आये घर आकर के वे चिल्लाए। देख लिया हमने जग सारा अपना घर है सबसे प्यारा। ...Read More

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भूल गया है क्यों इंसान

Bhool Gaya Kyon Insaan Hindi Rhymes

सबकी है मिट्टी की काया, सब पर नभ की निर्मल छाया। यहाँ नहीं कोई आया है, ले विशेष वरदान, भूल गया है क्यों इंसान? धरती ने मानव उपजाए, मानव ने ही देश बनाए। बहु देशों में बसी हुई है, एक धरा-संतान। भूल गया है क्यों इंसान? देश अलग है, देश अलग हों, वेश अलग हो, वेश अलग हों। मानव का मानव से लेकिन, अलग न अंतर प्राण। भूल गया है क्यों इंसान? ...Read More

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हम कुछ करके दिखलाएँगे - कविता

Ham Kuchh Karake Dikhalaenge Hindi Rhymes

है शौक यही, अरमान यही, हम कुछ करके दिखलाएँगे, मरने वाली दुनिया में हम, अमरों में नाम लिखाएँगे। जो लोग गरीब भिखारी हैं, जिन पर न किसी की छाया है, हम उनको गले लगाएँगे, हम उनको सुखी बनाएँगे। जो लोग अँधेरे घर में हैं, अपनी ही नहीं नजर में हैं, हम उनके कोने कोने में, उद्यम का दीप जलाएँगे। जो लोग हारकर बैठे हैं, उम्मीद मारकर बैठे हैं, हम उनके बुझे दिमागों में, फिर से उत्साह जगाएँगे। रोको मत, आगे बढ़ने दो, आजादी के दीवाने हैं, हम मातृभूमि की सेवा में, अपना सर्वस्व लगाएँगे। ...Read More

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