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हम कुछ करके दिखलाएँगे - कविता

है शौक यही, अरमान यही, हम कुछ करके दिखलाएँगे,
मरने वाली दुनिया में हम, अमरों में नाम लिखाएँगे।

जो लोग गरीब भिखारी हैं, जिन पर न किसी की छाया है,
हम उनको गले लगाएँगे, हम उनको सुखी बनाएँगे।

जो लोग अँधेरे घर में हैं, अपनी ही नहीं नजर में हैं,
हम उनके कोने कोने में, उद्यम का दीप जलाएँगे।

जो लोग हारकर बैठे हैं, उम्मीद मारकर बैठे हैं,
हम उनके बुझे दिमागों में, फिर से उत्साह जगाएँगे।

रोको मत, आगे बढ़ने दो, आजादी के दीवाने हैं,
हम मातृभूमि की सेवा में, अपना सर्वस्व लगाएँगे।

हम उन वीरों के बच्चे हैं, जो धुन के पक्के-सच्चे थे,
हम उनका मान बढायेंगे, हम जग में नाम कमाएँगे।

Ham Kuchh Karake Dikhalaenge Hindi Rhymes

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Hai Shauk Yahee, Aramaan Yahee, Ham Kuchh Karake Dikhalaenge,
Marane Vaalee Duniya Mein Ham, Amaron Mein Naam Likhaenge.

Jo Log Gareeb Bhikhaaree Hain, Jin Par Na Kisee Kee Chhaaya Hai,
Ham Unako Gale Lagaenge, Ham Unako Sukhee Banaenge.

Jo Log Andhere Ghar Mein Hain, Apanee Hee Nahin Najar Mein Hain,
Ham Unake Kone Kone Mein, Udyam Ka Deep Jalaenge.

Jo Log Haarakar Baithe Hain, Ummeed Maarakar Baithe Hain,
Ham Unake Bujhe Dimaagon Mein, Phir Se Utsaah Jagaenge.

Roko Mat, Aage Badhane Do, Aajaadee Ke Deevaane Hain,
Ham Maatrbhoomi Kee Seva Mein, Apana Sarvasv Lagaenge.

Ham Un Veeron Ke Bachche Hain, Jo Dhun Ke Pakke-Sachche The,
Ham Unaka Maan Badhaayenge, Ham Jag Mein Naam Kamaenge.

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